​दिल्ली एनसीआर के एकमात्र बचे जंगल – अरावली क्षेत्र को आज ज्यादातर नेता और सरकारी अफसर एकजुट होकर बेचने और इसे ‘जंगल ना होने’ का तमगा देने में लगे हैं जो की आने वाले समय में पूरे दिल्ली एनसीआर के लिए बहुत बड़ा खतरा होने वाला है.

आम जनता और कुछ गैर सरकारी संस्थाएं इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं परन्तु ये विभाग और नेता थमने का नाम नही ले रहे हैं। इसके कुछ कारण हैं-

1. अरावली का क्षेत्र या तो यहां के गांवों की पर्सनल प्रोपर्टी है या वन क्षेत्र है जिनमे की PLPA की धारा 4-5 लगी है जिसके मुताबिक यहां कोई भी गैर वानिकी कार्य अपराध है। अब क्योंकि ये जमीन या तो यहां के लोगों की प्रॉपर्टी है, ये लोग इस जमीन को बेच तो सकते हैं परंतु इसमे कुछ काम नही कर सकते। इसके कारण ये जमीन बहुत ही सस्ती है।

2. फरीदाबाद एक औद्योगिक नगर रहा है, पूरे हरियाणा और आस पास के क्षेत्र के सरकारी अफसर यहाँ घूस दे कर अपना ट्रांसफर करवाते हैं ताकि मोटा पैसा कमा कर वापिस अपने इलाके में जा सके, ताकि अपनी भर्ती में दिया गया घूस का पैसा रिकवर हो सके। शहर, जो कि 80% बाहर की जनता संजो के बना है, और विकासशील रहा है, ने इन अफसरों को कमाई करवाने में पूरा सहयोग दिया है। उनको या तो इस बारे में पता ही नहीं, या फिर दिनरात की भागमभाग में उनके पास समय ही नही इनसे बात तक करने का। परिणाम स्वरूप कुछ दिन बाद ये अफसर फरीदाबाद में ही अपनी जड़ जमा जाते हैं और यहाँ प्रोपेर्टी खरीद लेते हैं। हम आपको बता दें कि ज्यादातर अफसरों ने अरावली में बड़े बड़े रकबे खरीद कर डाले हुए हैं।

3. विकासशील होने के कारण यहां के नेता अन्य जिलों से ज्यादा धन कमा लेते हैं जिसको की आम तौर पर अरावली जैसे इलाके में ही इन्वेस्ट करते हैं।

4. अरावली का लगभग पूरा क्षेत्र एक खास जाति के गाँव वालों की प्रॉपर्टी है जो कि विकास की दौड़ में अपने आप को आगे रखने के लिए अपने अरावली क्षेत्र, जो कि खेती करने योग्य नहीं है और जिसकेे डायरेक्ट बेनेफिट्स दिखाई नहीं देते हैं, को इन नेताओं और अफसरों को बड़ी आसानी से, बहुत सस्ते में बेच देते हैं।

5. यहाँ का बड़ा इलाका जंगल है, माइनिंग होने के समय से यहां आम जनता का आना जाना बहुत ही कम होता है जिसका फायदा उठा कर कुछ नेताओं और बदमाशों ने इसमें कच्ची कालोनियां काट काट कर बेची हैं जिनमे उन्होंने और सरकारी अफसरों ने खूब पैसा कमाया है। अब वो कालोनी यहां के जंगल को खत्म कर चुकी हैं। और इन नेताओं की लगातार आमदनी का स्त्रोत हैं।

6. यहाँ के कुछ स्थानीय दभंगो ने पहाड़ का एक बहुत बड़ा हिस्सा या तो खुद कब्जा लिया जिसको पुराने समय मे ही अपनी पर्सनल प्रोपर्टी बना लिया या फिर कब्जा करके उसके कागज बनवा कर सस्ते रेटों में कंपनियों और बिल्डरों को बेच दिया है।

7. आज अरावली का ज्यादातर इलाका मोटे सेठों, नेताओं और भ्रष्ट नेताओं की प्रॉपर्टी है।

8. क्योंकि यहां ज्यादातर अफसर हरियाणा के अन्य जिलों से हैं तो इनको शहर की संपदा, संसाधनों आदि से कोई मतलब नही है, ज्यादातर असफर यहाँ से कुछ भी करके मोटा पैसा कमा कर वापस निकल जाते हैं। उनको केवल 2-3 यहां रहकर कमाने का मौका मिलता है जिसका की ये भरपूर आनंद लेते हैं।

अब समय आया है कि शहर भर चुका है, अंदर शहर पुराना हो चला है, अरावली को छोड़ कर और कहीं रहने की जगह नही है। अब ये नेता और अफसर अपनी इन्वेस्टमेंट को इनकैश करने में पूरा जोर लगा रहे हैं। इन सब ने मिलकर एक स्ट्रांग लोब्बी बना ली है कि यहाँ प्लॉटिंग की जाए या बिल्डिंगे बनाएं जिससे कि उनकी इन्वेस्टमेंट पर मोटे रिटर्न्स मिल सकें।

इसके लिए सबसे जरुरी है यहां अंग्रेजों के समय से जंगल को संरक्षित करने के लिए बनाये गए एक्ट – PLPA 1900 और वन विभाग की धारा 4 जिनके अनुसार ये इलाका जंगल है और यहाँ किसी भी तरह का गैर वानिकी कार्य करना अपराध है।

अब इन लोगों ने एकजुट होकर अपनी पूरी ताकत लगा रखी है कि इस इलाके को ‘वन क्षेत्र’ ना होने का टैग कैसे लगाया जाए। इसके लिए ये कभी तो यहाँ के प्रमुख पेड़ कीकर को ‘दानवीय पेड़’ घोषित कर देते हैं, इसको कटवाने की दलील देते हैं पर जनता के विरोध पर अपनी घोषणा को गलती से छपी रिपोर्ट करार दे देते हैं और कभी पूरे फरीदाबाद की अरावली को ‘अरावली’ ही ना होने का दस्तावेज बना कर सरकार और कोर्ट को पेश करते हैं।

सरकारी अफसरों व नेताओं की ये गतिविधि ठीक उसी तरह है जिस तरह शरारती बालक छुट्टी लेने के ऊटपटांग तरीके अध्यापक को बताता है और पकड़े जाने माफी मांग लेता है।

परन्तु सेव अरावली संस्था अपने वॉलिंटियर्स, कानूनी सलाहकारों एवं आम जनता को साथ लेकर लगी है इन ‘इन्वेस्टर’ अफसरों और नेताओं के झूठे धंधों को सबके सामने लाने और आज की  जनता और आने वाली पीढयों के हित के लिए इन भ्रष्टाचारियों को यहां से घसीट कर भगाने में ।

अगर आप भी इस सच को समझते हैं और पर्यावरण के बारे में चिंतित हैं तो हमारी मुहीम का हिस्सा जरूर बनें। हम लगभग हर सोशल साइट पर उपलब्ध हैं। हमसे जुड़ने के लिए ये छोटा सा फॉर्म भरें – www.SaveAravali.org/volunteer


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