फ्री पानी की कहानी…

जब कोई आदमी या हमारा जैसा संगठन अवैध टैंकरों द्वारा कच्ची कलोनियों में पानी की बिक्री रोकने की बात करता है तो वहां के नेता और नेताओं के खरीदे हुए अफसर एक ही बात चिल्लाते हैं,”पानी तो देना ही है भाई इनको”.

हम कहते हैं क्यों दें इनको पानी. इनका कोई हक़ नहीं बनता हमारा पानी छीनने का. आओ समझाते हैं पीछे की कहानी-

सरकारी या शामलात जमीन पर जंगल आदि को काट कर, जोहड़ों को भर कर दो चार झुग्गी बनती हैं, एक दो साल में वो कलोनी बन जाती है, फिर वो वहां के स्थायी निवासी हो जाते हैं, अपना हक़ मांगने लग जाते हैं और जी का जन्जाल बन जाते हैं!

असल में ये सब नेताओं के द्वारा पाले जाते हैं-

  • उनको उस कालोनी में लाया जाता है जिसमे उस नेता की पूरी धाक चलती है.
  • फ्री में पानी दिया जाता है
  • चोरी की बिजली सस्ते रेट में दी जाती है
  • फ्री की जमीन को सस्ते रेट में बेचा जाता है
  • उनको किसी तरह का दुःख ना हो इस बात का पूरा ख्याल रखा जाता है
  • उनको पूरा सपोर्ट दिया जाता है की वो सस्ती लाइफ जियें और खूब जनसँख्या बढाएं. बाद में तो नेता जी सम्भाल ही लेते हैं चाहे चार करो चाहे दस.
  • उनके झगडे करवाये जाते हैं,फिर नेता जी द्वारा फैसले किये जाते हैं.सम्झौतों के नाम पर उन्ही से पैसे लिए जाते हैं.
  • उनको महंगे ब्याज पर पैसे दिए जाते हैं. नेता जी खूब पैसे कमाते हैं.
  • उनको बसने के लिए किराए पर कोठे दिए जाते हैं, नेता जी के हजार हजार कमरे होते हैं और किराया वसूलने वाले मैनेजर. बैठे बैठे लाखों आते हैं.
  • वो आस पास चोरी, लूट, नशाखोरी करते हैं, उन्ही को आपके घरों में सिक्यूरिटी गार्ड लगाया जाता है.
  • उनकी वोट बनवायी जाती हैं
  • उनको सारी सरकारी स्कीमें और छूटें दिलवायी जाती हैं.
  • उनकी “पक्की” वाली वोटों से नेता जी झटके से विधायक और सान्सद बन जाते हैं.
  • और ना जाने किस किस तरह से आप जैसों की ऐसी की तैसी की जाती है.

सरकारी अफसरों को नेता जी के साथ अच्छी बैठ बनाये रखने के बदले छुटटियों व शादियों में जाने के लिए लग्जरी कार दे दी जाती हैं, थोडा बहुत चन्दा चढ़ा दिया जाता है. अफसर बाबू पूरी मदद करते हैं नेता जी की.

आप ठहरे नरम दिल के…. एक टैंकर पानी की कीमत तुम क्या जानो ओम बाबू …!

अब दूसरा पहलु देखें, अगर ये पानी इन लोगों को ना मिले तो क्या हो-

  • लोग फ़ोकट में बच्चे पैदा नहीं करेंगे, पानी बिना प्यासे मरने की चिंता ही नपुन्सक बना देगी दस दस बच्चे करने वालों को.
  • कलोनियों की संख्या नहीं बढ़ेगी.
  • कोई भी ऐरा गैरा नेता नहीं बनेगा.
  • आपका पानी आपका ही रहेगा.
  • और बहुत सारे दुखों से निवारण मिलेगा.

अब आप ये कहोगे की अगर ये लोग नहीं रहेंगे तो लेबर नहीं मिलेगी. पर ऐसा कतयी नहीं है, लेबर मिलेगी. जो स्थानीय लोग बेरोजगारी का राग गाते हैं उनको काम मिलेगा. आपको थोडा मेन्ह्गा पडेगा लेकिन आज की मेन्ह्गाई के बराबर नहीं होगा.

कुछ ख़ास राज्यों से लोगो का पलायन रुकेगा, वो अपने खेतों में काम करेंगे और देश की पैदावार बढायेंगे. आज वो तीस साल पुराना ज़माना नहीं की वहाँ सुविधायें नहीं हैं, सभी राज्यों की सरकारें खूब सुविधायें दे रही हैं अपने लोगों को. पलायन अपने आप में विश्व स्तर की बहुत बड़ी समस्या है, उस पर कन्टरोल होगा.

इस पोस्ट का मतलब ये नहीं की हम गरीबों के खिलाफ हैं बल्की हम प्रयावरण और सामाजिक असंतुलन और उसके फैकटर्स को आपको दिखाना चाहते हैं.

अगर हमारी इस सोच पर आपको आपत्ति है या शक है तो दिल्ली, मुंबई और कुछ महानगरों के अलावा देश के किसी भी छोटे शहर में जा कर देखें, कैसा जीवन है वहां, कैसा प्रयावरण है वहां. रोजाना नहाते हैं वहां के लोग!

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  1. August 13, 2016, 12:35 am