अरावली में जमीन घेरना और निर्माण करना हुआ वैध। केंद्रीय मंत्री ने की घोषणा।

बनाओ बनाओ… सब बनाओ… कोई नही तोड़ेगा।

कहते हुए कल एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोदी जी के मंत्री श्री कृष्ण पाल गुर्जर ने खुश होकर पत्रकारों को आजादी दी और घोषणा की की अरावली में निर्माणों को कोई नही तोड़ेगा, सरकार का काम बनाने का है, तोड़ने का नही।

कुछ पत्रकारों ने जब केंद्रीय मंत्री जी से सीधा सवाल पूछा कि क्या हम भी बना सकते हैं अरावली में फार्म हाउस तो मंत्री जी ने बड़े गर्व से कहा कि बनाओ बनाओ, जमीन है तो बनाओ तुम भी।

मंत्री जी के साथ वार्तालाप का वीडियो पंजाब केसरी न्यूज़ चैनल ने सोशल मीडिया पर प्रकाशित किया है जिसको खूब फैलाया जा रहा है।

https://youtu.be/NNpJi8aIrak

जहां एक और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठन सरकार के साथ मिलकर दिल्ली एनसीआर में पर्यावरण संरक्षण की बात कर रहे हैं, बजट बना रहे हैं वहां उसी सरकार के केंद्रीय मंत्री का बेतुका बयान पर्यावरण संरक्षण करने वाले सरकारी और गैर सरकारी संगठनों के मुँह पर तमाचा है।

BJP के ये नेता खुलकर कर रहे हैं अरावली में खनन और पत्थर चोरी

मोदी जी चाहे जितने भी महान व्यक्ति हों, चाहे जितने भी महान काम कर रहे हों लेकिन उनके कार्यकर्ता उनके शासन का जबरदस्त फायदा उठा रहे हैं।

हरियाणा में खट्टर साब अपनी सरकार को चाहे कितनी ही ईमानदार घोषित करने की बात करते हैं लेकिन उनकी सच्चाई है कि ग्राउंड पर उन्ही के नेतागण खुल्लम खुल्ला चोरी और अवैध कामों में जुटे हैं।

फरीदाबाद के अरावली वन संरक्षित क्षेत्र जिसको की सरकारी रिकॉर्ड में पंजाब जमीन संरक्षण अधिनियम की धारा 4 और 5 और माननीय NGT एवं सुप्रीम कोर्ट की और से कई कानूनी निर्देशों के तहत अति संवेदनशील और सुरक्षित रखा गया है

यहां भाजपा के नेता वीरेंदर भड़ाना उर्फ बिन्दे जो कि अपने आप को मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर और केंद्रीय मंत्री श्री कृष्ण पाल गुर्जर के करीबी घोषित करते हैं, खुले आम इस क्षेत्र में खनन करते हैं और दिन में लगभग 50 से 60 गाड़ियां पत्थर चोरी कर रहे हैं

शनिवार दिनाँक 29 दिसम्बर 2018 को जब हमारी टीम के कैलाश बिधूड़ी एडवोकेट, संजय राव और कुछ अन्य सदस्य एक राष्ट्रीय हिंदी टीवी चैनल TV9 की टीम के साथ फरीदाबाद के अनंगपुर क्षेत्र में बनी कृत्रिम झीलों पर एक रिपोर्ट तैयार करने वहां गए तो उन्होंने कुछ गाड़ियों को वहां खुलेआम दौड़ते देखा और एक दो को रोकने की कोशिश लेकिन वो नही रुके और हमारी गाड़ियों पर ही ट्रक चढ़ाने की पूरी कोशिश करके वहां से भागते रहे। कुछ देर बाद जब पत्रकारों ने हिम्मत दिखाकर अपनी कार रास्ते में लगा दी तो एक ट्रैक वाले को ट्रक रोकना ही पड़ा जिससे हुई बातचीत को हमने इस वीडियो में रिकॉर्ड कर लिया।

https://youtu.be/M3ZwzrAO3DU

वीडियो में ट्रक ड्राइवर हमे धमकाने और डराने की पूरी कोशिश करते हुए साफ दिख रहा है लेकिन हमारे लोकल बोली में बात करने पर उसकी टोन बदल गई और उसने जो बोला वो अचंभित करने वाला है।

ड्राइवर ने बताया कि ये गाड़ियां भाजपा नेता वीरेंदर भड़ाना की हैं जो कि अनंगपुर ग्रीनफील्ड के हैं और दिन में करीब 50 से 60 गाड़ियां पत्थर आराम से निकाल लेते हैं।

इसकी जानकारी हमने जिला वन अधिकारी को दे दी है लेकिन जिला खनन अधिकारी का मोबाइल नंबर हर दिन की तरह बंद दिखाई पड़ रहा है।

भयंकर प्रदूषण और पर्यावरण असंतुलन की भयावहता से गुजरते एवं कानून के गढ़ कहे जाने वाले दिल्ली एनसीआर में किस तरह आज भी खुल्लमखुल्ला पर्यावरण और कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, ये वीडियो इस बात का ठोस सबूत है।इस घटना पर कार्यवाही करते हुए हमने कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी है।

अब देख जाना है कि अरावली के बाकी केसों की तरह ही हरियाणा सरकार इस केस को भी जबदस्ती दबाती है या इस पर कोई कार्यवाही की जाएगी।

Engineer breaks down while discussing the air quality in live interview

“Our kids are not safe and getting infected of so many diseases unnecessarily. Everyone in Delhi NCR has turned into a smoker.The statics says that lung cancer cases are increasing day-by-day. The condition of air in Delhi NCR is going worse day by day and instead of taking proactive steps to control the situation, the government is still believing in promoting the air purifiers, masks and packed oxygen. We have got no option other than getting into a slow death situation now…’ and he breaks down by weeping during a live show done by Save Aravali Trust in their weekly Aravali Live event in Sector 21 market of Faridabad.

Neeraj Lohan, a resident of Faridabad and engineer by profession blames the administration and the government for not doing any effective e work on the disastrous situation of air pollution and playing with the health and lives of the citizens.

Not only Neeraj, 90% of total interviewed people were found in the same condition when our team started discussing the air quality index with the citizens of Faridabad. They blamed the administration and the government for not working up to the marks, not educating the general public and staying busy in general issues of political leaders.

क्या अरावली को बचाने भी कोई सरफिरा आशिक आएगा ?

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एक दशरथ मांझी भी हुए है इस दुनिया में जिन्होंने अपनी पत्नी की याद में अकेले ही एक कुल्हाड़ी और हथौड़े से, पहाड़ तोड़कर रास्ता बनाया था पर आज इन पहाड़ो को ज़रुरत है एक ऐसे दीवाने आशिक़ की जो इनके लिए पूरी दूनिया के खिलाफ खड़ा होकर, इनके अस्तित्व की लड़ाई लड़ सके। यह उम्मीद करना अब इन पहाड़ो के लिए मुश्किल है कि कोई इंसान  इनकी रक्षा करने के लिए आगे आएगा, इनकी बुनियाद, इनके सम्मान के लिए लड़ेगा लेकिन पहाड़ ये नहीं जानते कि आज भी कोई ज़िंदा है जो इसकी मिटटी की खुशबू में पला बड़ा है और इसके पास लौटने के लिए मचल रहा है, कोई है जो इसके हर ज़ख्म को अपने हाथों से छूकर इसके दर्द का एहसास कर रहा है, जो इन पहाड़ो से जुड़ी हर याद को अपने सीने में कैद करके किसी बहुत बड़े उद्देश्य की तैयारी में दिन रात एक करके इन पहाड़ो के संघर्ष में अपना भी योगदान दे रहा है। वह आशिक़ तब तक हार नहीं मानेगा जब तक ये पहाड़ खुद सर उठाकर उसके हौसले, उसकी मोहब्बत को सलाम न करे और इंसानो की अदालत में उन्हें न्याय न मिले

अरावली

विश्व की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला, ‘अरावली ‘ भारत की पृष्ठभूमि पर खड़ी, यह अप्रसिद्ध पर्वत श्रृंखला मौत के बेहद नज़दीक है। किसी समय में अपने विशाल व्यक्तित्व के लिए विख्यात यह पर्वत श्रंखला इस वक़्त ज़िन्दगी की आखिरी सांसे गिन रही है।
अरावली के पहाड़ अपने आप में खास नहीं है, आज यह कद में दूसरे पहाड़ो के मुकाबले काफी छोटे है।यहाँ के पहाड़ हिमालय या कश्मीर के पहाड़ों जैसे सफ़ेद बर्फ की चादर तो दूर, प्रकृति के किसी अभिशाप से, वनस्पती के अभाव से भी पीड़ित है। क्योंकि लोग प्राकृतिक सौंदर्य को एक लेबल दे चुके है, समुद्र, रेगिस्तान जंगल और ज्वालामुखी और बर्फ़ीले पहाड़ो के अलावा प्रकृति को देखना, समझना और जानना पसंद नहीं करते है इसलिए अरावली के पहाड़ो की खुबसुरती से अक्सर अनजान रह जाते है।

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इन पहाड़ो की तन्हाइयों में आज भी 1 कहानी गूंजती है। वह कहानी जो इन बेकसूर, मासूम पहाड़ो की वेदना में छिपी है, जिसे हम इंसानो ने अनसुना और अनदेखा कर दिया, अपने स्वार्थ के लिए।
मानव सभ्यता के आने से कई करोड़ो साल पहले ही इन पहाड़ो का धरती से रिश्ता जुड़ चुका था , न जाने कितने घोर तूफानो को इन मज़बूत पहाड़ो ने सहा है। अनगिनत पशु पक्षियों ने इन पहाड़ो में जन्म लिया, इसे अपना आशियाना बनाया और अपनी पूरी ज़िन्दगी इसके साये में गुज़ार इसकी गोद में ही दम तोड़ दिया। इन पहाड़ो का वजूद मिटाने आये हम इंसानो की, इन पहाड़ो के सामने चींटी की भी औकाद नहीं होती अगर हमारे पास सोचने समझनेे और कुछ जानने के लिए दिमाग नहीं होता। शायद इन पहाड़ो का कसूर सिर्फ इतना ही था कि  विकास और प्रगति के पथ पर चल रहा एक समाज देश और एक सभ्यता इंसानों की होकर भी इंसानियत से वंचित रह गई।

अपनी काबिलियत और लगन के भरोसे आज इन पहाड़ो को अपने आगे झुकाने में हम कामयाब तो हो चुके है लेकिन उन पहाड़ो की नज़रों में शायद हम सिर्फ घमंड और स्वार्थ से भरे खूंखार मशीनी जानवर है जो बेवजह उनकी शांति और अमन के साथ खिलवाड़ करते है, अपने अहंकार में जीते है, यहाँ तक कि अपनी ही प्रजाति के दूसरे प्राणियों की परवाह नहीं करते जो इन पहाड़ो पर आश्रित है।

हमारे पूर्वजों ने इन पहाड़ो की हिफाज़त के लिए बहुतेरी लड़ाइयां लड़ी है, इन पहाड़ो पर बसे कुछ गांवो मे आज भी इन्हें देवताओ की तरह पूजने का चलन है लेकिन प्रकृति का क़त्ल सरेआम करने वालो की कमी भी तो नहीं इस दुनिया में। वो लोग इन पहाड़ो को, कीमती पत्थरो का अवैध खनन करने के लिए जो नुकसान पहुँचाते है उसका खामियाज़ा चुकाने की तैयारी अब हमें कर लेनी चाहिए।
ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज जैसी समस्याओं से आज इसी वजह से हमें सामना करना पड़ रहा है क्योंकि व्यापार और औद्योगिकरण ने हमे सीखा दिया है- प्रकृति की कीमत तय करके उसे बेचना, खरीदना और इस्तेमाल करके उसे अपने रास्ते से उखाड़ फ़ेंक देना।
इन पहाड़ो के इतिहास को किताबे पढ़कर नहीं जान सकते, उसे जानने के लिए ज़रूरी है इन उजड़े पहाड़ो के समीप होना, इनकी उदासी को अपनी आँखों से देखकर महसूस करना और सुनना इनकी ख़ामोशी की भुला दी गई दास्तान !

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एक दशरथ मांझी भी हुए है इस दुनिया में जिन्होंनो अपनी पत्नी की याद में अकेले ही एक कुल्हाड़ी और हथौड़े से, पहाड़ तोड़कर रास्ता बनाया था पर आज इन पहाड़ो को ज़रुरत है एक ऐसे दीवाने आशिक़ की जो इनके लिए पूरी दूनिया के खिलाफ खड़ा होकर, इनके अस्तित्व की लड़ाई लड़ सके। यह उम्मीद करना अब इन पहाड़ो के लिए मुश्किल है कि कोई इंसान  इनकी रक्षा करने के लिए आगे आएगा, इनकी बुनियाद, इनके सम्मान के लिए लड़ेगा लेकिन पहाड़ ये नहीं जानते कि आज भी कोई ज़िंदा है जो इसकी मिटटी की खुशबू में पला बड़ा है और इसके पास लौटने के लिए मचल रहा है, कोई है जो इसके हर ज़ख्म को अपने हाथों से छूकर इसके दर्द का एहसास कर रहा है, जो इन पहाड़ो से जुड़ी हर याद को अपने सीने में कैद करके किसी बहुत बड़े उद्देश्य की तैयारी में दिन रात एक करके इन पहाड़ो के संघर्ष में अपना भी योगदान दे रहा है। वह आशिक़ तब तक हार नहीं मानेगा जब तक ये पहाड़ खुद सर उठाकर उसके हौसले, उसकी मोहब्बत को सलाम न करे और इंसानो की अदालत में उन्हें न्याय न मिले |

-Shrestha Chopra

Leopard killings in the Aravali

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Recently a leopard strayed into village Mandaawar in Gurgaon District in Aravali region,and was clubbed and lynched to death by the villagers after it mauled nine people including a policeman.

It was a sort of circus show for the villagers, an instance of gross neglect of duty by the wild life preservation and forest officials of the area.

Height of truth is that the forest officials had not even the tranquilizers to calm and sedate the panicked cat which had strayed into the forbidden territory of human animals.

This is not an isolated incident. There have been repeated instance of big cats straying into human habitation in last few years. That they are around is a welcome thing, they are being clubbed, lynched is very tragic. There are even reports of poaching and hunting of these hapless animals and use of poisoned goats being used as baits for these big cats have been reported by media.

One big cat was run over by vehicle on highway in Sarahan village a few months earlier. One reason for frequent sightings of these big cats in Aravalis region is complete ban on mining of minor minerals in Gurgaon and Faridabad districts and increase of green cover in the area through efforts of forest department and some NGOs.

However,the common adage “Won’t let them live, won’t let them perish”applies here. Though the ban on mining activities and increased forest cover has been conducive for growth of these big cat,lack of proper ecological circuit in the area forces them to stray into human habitation be it lack of proper water bodies,intervening human dwellings and inert attitude of forest and wildlife officials towards these hapless animals.

Coming to bare statistics,hardly 3 to 4% of total area in Haryana state falls under forest cover , predominantly in Aravalis region in Faridabad, Gurugram, Riwari, Palwal and Narnaul districts. Technically the same is not declared “forest area” and demarcated as “Gair Mumkim pahad ” in revenue records, land not fit for cultivation and revenue generation and totally at the mercy of rapacious builders and crafty urban planners, though at the great peril to huge urban conglomerates coming around in this area.

Dire need is that the State government,in association with the Central government, in the interest of healthy ecological environment for the people residing here, and flora and fauna of this area, should adopt a stiff and pragmatic approach and declare the hilly areas in this region as ‘No Residential zone’ and take effective steps for declaring the areas as Protected Area under Chapter.4 of Wild life Protection Act 1972 .

The State government has power u.s.18 of Wild Life Protection Act 1972 to constitute an area other than an area comprised within any reserve forest or the territorial waters as a sanctuary if it considers that such area is of adequate ecological, fauna, floral, geomorphological, natural or zoological significance for the purpose of protecting, propagating or developing wild life or its environment.

The basic principle is that if the wild life around is thriving, it is a sure shot test for healthy and pollution free environment. Let there be a message to the wild life around that we care for you. Let our national capital boast of a wild life sanctuary in neighborhood.

We, the ‘Save Aravali’ team make fervent appeal to the authorities to respond to this clarion call and take timely and visionary step for guaranteeing a healthy, pollution free, ecologically balanced environment for the people around and flora and fauna of this area.

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Kuldeep Malik
Retired Excise and Taxation Commissioner
Advocate-Supreme Court
Activist-Save Aravali

Another leopard killed in Gurgaon Faridabad Aravali

भोजन पानी आदि की तलाश में जंगल में भटक भटक रहे बेक़सूर तेंदूए को आज सुबह गुडगाँव फरीदाबाद बॉर्डर पर अरावली में बसे गाँव मंडावर के लोगों ने लाठियों से पीट पीट कर मार डाला.

पिछले दो सालों में इस इलाके में तेंदुए की ये चौथी मौत है. गौर तलब है की पिछले कुछ दिनों पहले ही कुछ अखबारों में अरावली में तेंदुआ देखे जाने की खबर को छापा था जिसके बाद ग्रामीणों ने हर तेंदुए जैसे जानवर को अपना शिकार बनाने की कोशिश करनी शुरू कर दी थीं. आज की घटना में भी लोगों ने पुलिस और वन विभाग के लोगों के साथ खूब हाथापाई की और अंततः तेंदुए को मार डाला.

इतना होने के बावजूद भी पर्यावरण मंत्रालय की और से इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाये जा रहे हैं.

 

Seeking support from all of you

Road Side plant watering

 

Yes, lets do our part.

We are doing a special drive in which we shall water the plants on the Surajkund road, Pali road and Gurgaon road of Faridabad. We are seeking support from everyone to join hands in this great campaign.

 

 

 

Application sent to an International Competition by DublDom

The proposal is regarding the initiative of Save Aravali to develop ecotourism spots in Aravali range to connect the masses with nature. Lack of exposure and absence of empathy in residents of Delhi  NCR for the natural heritage of Aravali is one of the major reasons for its exploitation and illegal activities. If selected then DublDom will install a modular house at our site free of cost which we can further utilize as a cafe or a social space to discuss and experience nature.

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ये है सूरज कुंड का असली चेहरा.

चलो जी आज आपको सैर कराते हैं विदेशों तक मशहूर, फरीदाबाद की शान सूरजकुंड की।

जी हाँ, वही सूरजकुण्ड जहाँ मेला लगता है। पूरी दुनिया आती है। पूरे पंद्रह दिन चलता है। बड़ी बड़ी पार्टियां होती हैं यहाँ। विश्व स्तर के होटल हैं यहाँ। मोदी जी की पसंदीदा जगहों में से एक है ये जगह। देश का लगभग हर नेता आया होगा यहाँ. बस पार्टी करके निकल लेते हैं.

सब सूरजकुंड आते हैं। राजा अनंगपाल के बनाये इस ऐतिहासिक स्मारक को देखने।

परन्तु ये है असली सूरजकुंड. 15 अक्टूबर 2016 की तस्वीर –

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खुजली वाले कुत्ते, जिसको बाकी कुत्तों ने मारा पीटा हो, की सी हालत है असली सूरजकुंड की. और इसके जिम्मेदार हैं – नेता और अफसर. खूब लूटा है बेचारे सूरजकुंड को. अभी भी इसी के नाम पर पैसे कमा रहे हैं.  शायद आप ये भी जानना चाहेंगे की ये हुआ कैसे?
अगर किसी नेता या अफसर से इसके बारे में बात की जाए तो उनका एक ही जवाब होगा- बारिश ही कहाँ होती हैं जी आज कल. कहाँ से भरे सूरजकुंड?

लेकिन सच्चाई कुछ और ही है. चलो हम ही बता देते हैं-
– यहाँ के आस पास की जमीन (सरकारी जमीन भी) नेताओं और अफसरों ने मिल बाँट कर बेच दी है.
– सूरज कुंड के कैचमेंट एरिया (जहां से इसमें पानी आता है) में कच्ची कलोनियाँ बसा दी गयी हैं. नेता लोग उन कलोनियों में वोट कमाने के लिए आये दिन नारियल फोड़ने जाते रह्ते हैं.
– इसके चारों और आस पास के नालों को इकसार करवा कर बड़े बड़े लोगों ने फार्म हाउस बना दिए हैं. मजेदार बात ये है की कागजों और सरकारी दस्तावेजों में लगभग पूरा इलाका पंजाब लैंड प्रिजर्वेशन एक्ट 1900 की सेक्शन 4 एवं 5 के तहत सुरक्षित है और यहाँ आना जाना तक मना है.
– बड़े बड़े नेताओं ने इसके चारों तरफ ट्यूबवैल लगा दिए हैं जिनसे पानी निकाल कर कच्ची कलोनियों में बेचा जा रहा है, बोतलों में भर भर के पूरे देश में सपलायी की जा रही है.

आपको एक अहम् बात और बता देते हैं की इस बार दिल्ली NCR में उम्मीद से ज्यादा बारिश हुयी है लेकिन सूरजकुंड में केवल यही पानी भरा है. जो आपको इस तस्वीर में दिख रहा है. ज्यादा ना कहा जाए तो- अगर यहाँ बादल भी फट जाए तो भी इतना ही पानी भरेगा इस में. क्योंकि नेताओं और अफसरों ने यहाँ जो विज्ञान लगाया है वो ये कह्ता है की जितना भी पानी बरसेगा वो ऑटोमेटिकली रुपयों में कन्वर्ट होकर इनकी जेबों में आ जायेगा.

हँसेंगे आप. कुछ को दुःख भी होगा. कुछ कहेंगे की सेव अरावली नेगेटीव चीजों को प्रेजेंट कर रही है. परन्तु हमें इससे कोई दुःख नहीं होगा क्योंकि हमारी इस पोस्ट से उन्ही लोगों को दुःख होगा जो इसके नाम पर नौकरियाँ कर रहे हैं, जमीने बेच रहे हैं, बिल्डिंगें बेच रहे हैं, होटल चला रहे हैं, नेतागीरी कर रहे हैं.