फरीदाबाद के अरावली के जंगल में देश की प्रसिद्द कंपनी ‘भारती ग्रुप’ द्वारा जंगल की जमीन पर फ्लैट बनाने के इरादे से रातों रात मशीनें लगाकर हजारों पेड़ साफ़ करने के मामले ने भी अब तूल पकड़ लिया है. हरियाणा सरकार और वन विभाग के बड़े अफसरों की बिल्डरों के साथ रिश्तेदारी अब खटाई में पड़ती नजर आ रही है.
सेव अरावली ट्रस्ट के मार्गदर्शक कर्नल सर्वदमन ओबेरॉय द्वारा माननीय सुप्रीम कोर्ट की बेंच NGT में दर्ज केस में अब सभी सरकारी अफसरों नें, विभागों ने और यहाँ तक की मंत्रालय ने भी अपनी अपनी जान बचाने के लिए, काण्ड में अपनी लिप्तता को ना दिखाने के लिए सब सच्चाई कोर्ट के सामने पेश करनी शुरू कर दी हैं.

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  • केस फाइल होने के तुरंत बाद फरीदाबाद की इमानदार जिला वन अधिकारी का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अपने तीन आईएफएस साथियों के साथ मिलकर अपने ही सीनियर सुनील गुलाटी के खिलाफ बदतमीजी करने और भारती लैंड को परमिशन देने के लिए गैरकानूनी दवाब बनाने की चंडीगढ़ में शिकायत कर दी. यही नहीं, इन चारों अधिकारियों ने एक स्तरीय मीटिंग में विभाग और सरकार की सच्चाई सामने ला दी की किस तरह उनको ‘ब्लडीफूल’ ‘रिजल्ट भुगतने होंगे’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके जंगल की जमीन को एक बिल्डर को देने के लिए दवाब दिया गया.
  • वन विभाग ने इस इलाके में सबसे ज्यादा फैले पेड़ “कीकर” को “दानवीय पेड़” घोषित करने की कोशिश की जिसको की दो दिन बाद ही “गलती से प्रकाशित” पत्र घोषित करना पड़ा.
  • हरियाणा सरकार ने सफाई दिखाते हुए ACS सुनील गुलाटी को मोहरा बना दिया और साहब की ट्रान्सफर करके अपने आप को पाक साफ दिखाने की कोशिश की है.
  • 23 अगस्त को NGT कोर्ट की तारीख से ठीक दो दिन पहले एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने अपनी तरफ से सफाई देते हुए कहा की पूरी अरावली का इलाका संरक्षित क्षेत्र है और इसमें किसी भी प्रकार की कंस्ट्रक्शन जो की मालिकाना हक़ के .50% क्षेत्र में होगी, गैरकानूनी मानी जायेगी. इस तरह भारती लैंड और इलाके में कब्ज़ा जमा कर बैठे सभी बिल्डिंगों वाले गैरकानूनी हैं.
  • कोर्ट के सभी सम्बंधित विभागों को इस बारे में रिपोर्ट पेश करने के आदेश पर फरीदाबाद के उप-आयुक्त की और से टिपण्णी आई की वो भी इसकी रिपोर्ट जल्द पेश करेंगे.
  • 23 अगस्त की सुनवाई में वन मंत्रालय भारत सरकार ने कोर्ट से अपनी रिपोर्ट पेश करने के लिए समय माँगा लेकिन दो दिन बाद ही दस्तावेज जारी कर दिए की मंत्रालय को तो इस तरह के किसी हाउसिंग प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी ही नहीं दी गयी और ना ही इससे सम्बंधित कोई प्रपोजल मंत्रालय में आया.
एक और जहाँ पूरी दुनिया प्रयावरण को बचाने और संजो कर रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है वहां हरियाणा के फरीदाबाद जो की हाल ही में देश का चौथे नंबर का प्रदूषित शहर घोषित किया गया है में इतने बड़े जंगल को बिल्डरों को बेचने के नए नए तरीके इजात किये जा रहे हैं लेकिन माननीय NGT की एक झड़क में ही इसमें लिप्त सब के सब लाइन हाजिर होते दिखायी पड़ रहे हैं.

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