दिल्ली एन सी आर का भटिन्डा बनता जा रहा है फरीदाबाद का ये क्षेत्र

कैंसर ट्रैन तो आप सब ने सुनी ही होगी. चलो फिर भी बता देते हैं- पंजाब के भटिन्डा जिले से एक स्पेशल ट्रैन चलती है बीकानेर और दिल्ली के लिए जिसमे केवल कैंसर के रोगी होते हैं जो की भटिन्डा जिले के ही हैं. इस जिले में कैंसेर इतना ज्यादा फ़ैल चुका है की हर घर में एक दो लोग कैंसेर के शिकार हैं. जिसका मुख्य कारण है जिले में एक बड़े फ़र्टिलाइज़र प्लांट, दो थर्मल प्लांट्स, दो सीमेंट प्लांट्स का होना और हरित क्रान्ति के दौरान ग्रामीणों द्वारा बहुत बड़े स्तर पर रसायनिक खादों का प्रयोग करके सबसे ज्यादा फसल पैदा करना.
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विकास हुआ, लेकिन इस विकास के परिणाम स्वरुप जिले का विनाश भी चालू हो गया है. भटिन्डा और आस पास के इलाके के खेत आज पूरी तरह से टॉक्सिक (जहरीले) बन गए हैं. फ़र्टिलाइज़र प्लांट, दो थर्मल प्लांट्स, दो सीमेंट प्लांट्स का निकला हुआ कचरा और लीचेट (कचरे के गलने सड़ने और पानी पड़ने से निकलता हुआ जहरीला पदार्थ) अपना काम कर रहा है.

अब सरकार परेशान है. टाटा वालों ने पड़ोस के संगरूर जिले में ही बहुत बड़ा कैंसर हस्पताल खोल दिया है. AIIMS खोलने की भी तैयारी लगभग पूरी हो चुकी हैं. राजनीती में हॉट टॉपिक बन गया है ये इलाका.

ठीक इसी तर्ज पर फरीदाबाद का अरावली क्षेत्र भी विकास कर रहा है यहाँ पर भी-

1. पूरे हरियाणा का मेडिकल हज़ारडस वेस्ट प्लांट लगा दिया गया है जिसमें की पूरे हरियाणा के अस्पतालों, रसायन बनाने वाली कम्पनियों एवं रासायनिक कचरा पैदा करने वाले सभी संस्थानों का कचरा लाया जा रहा है. पर्यावरण कार्यकर्ताओं की मानें तो उनको पूरा विश्वास है की यहाँ पूरी तरह वेस्ट ट्रीटमेंट होता ही नहीं और कचरे को पास ही की गहरी खानों में डाल दिया जाता है जिसके चलते उस इलाके के पानी का स्वाद बदल चुका है, खानों का रंग काला पड गया है.

2. गुडगाँव और फरीदाबाद की नगर निगम शहरों को साफ़ करके, उनके द्वारा भारी मात्र में पैदा कचरे को बिना कोई मेह्नत किये पिछ्ले पांच छः साल से अरावली वन क्षेत्र के बंधवाड़ी गाँव में 32 एकड़ में बने कचरा घर में दिन रात ट्रकों से डाल डाल कर गहरे पानी की कई खानें तो भरी ही हैं साथ में वहां कचरे के पहाड़ भी बना दिए हैं. जिसकी वजह से इलाके का पानी पूरी तरह से टॉक्सिक हो गया है, लगातार पशु पक्षी मर रहे हैं, जंगल तो लगभग कबाड़खाने में तब्दील हो ही चुका है.

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3. सेव अरावली संस्था द्वारा करीब डेड़ सौ छोटी छोटी युनिटों की पह्चान की गयी है जो भिवाड़ी और अलवर से बड़ी कम्पनियों द्वारा निकाले गए तेज़ाब को ला कर लोहा साफ़ करने का काम कर रही हैं. अधिकतर युनिटें पहाड़ क्षेत्र में हैं जो एक सप्ताह में लगभग पचास हजार लीटर तेजाब का प्रयोग लोहा साफ़ करने में कर रहे हैं. प्रयोग के बाद इस तेज़ाब को या तो आस पास के गड्ढो में या जोह्डों में या कुओं में या फिर आठ दस फ़ीट का कच्चा गड्डा खोद कर उसी में डाल देते हैं जो एक दो दिन में धरती में उतर जाता है.

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4. थर्मल प्लांट से निकलने वाली राख को लगातर बीस साल पानी में घोल कर पाईपों द्वारा अरावली के एक बहुत बड़े जोहड़ में भर दिया गया. थर्मल पॉवर के नुक्सानों को देखते हुए कुछ साल पहले प्लांट को तो बंद कर दिया गया परन्तु उस राख और जोहड़ की और अभी तक किसी की नजर नहीं गयी है. कुछ देहाती लोग इस राख को चोरी चुपके निकाल निकाल कर भरत करने में प्रयोग कर रहे हैं. ज्ञात रहे, इस राख में arsenic, lead, mercury, cadmium, chromium and selenium, और aluminum, antimony,
barium, beryllium, boron, chlorine, cobalt, manganese, molybdenum, nickel, thallium, vanadium, and zinc आदि भरी मात्रा में होता है जो की ना ठीक होने वाली बीमारियां और विकार पैदा करते हैं. विश्व स्तर पर काम करने वाली “The Environmental Protection Agency (EPA)” का कह्ना है की क्योंकि इस राख में आर्सेनिक व लेड बहुत ज्यादा होता है जो की आस पास के जमीनी पानी में घुल जाता है तो चांस होता है की उस इलाके के पचास में से एक आदमी को कैंसर जरूर होगा.

5. फरीदाबाद – गुडगाँव रोड पर एक लगभग एक किलोमीटर लम्बी और चार पांच सौ फुट गहरी खान जिसको की खनन कंपनी ने जमीनी पानी निकलने और बारिश का पानी भर जाने की वजह से खनन बंद कर दिया था को हाल ही में फरीदाबाद नगर निगम द्वारा फरीदाबाद और गुडगाँव शहरों के कचरे से भरने का प्लान पर्यावरण मंत्रालय को यह कह कर दिया गया है की यह जगह बंजर है और इससे किसी भी तरह का कोई फायदा नहीं है. जिले के वन विभाग अधिकारियों ने भी नगर निगम अधिकारीयों के साथ भाई चारा निभाने के लिए यहाँ खड़े लगभग पच्चीस हजार बड़े पेड़ों को काटने की यह कह्कर अनुमती दे दी की ये झाड़ियाँ हैं.

6. ट्रक्टरों द्वारा सेप्टिक टेंक साफ़ करने वाले ठेकेदारों के लिए तो ये इलाका मानों जागीर ही बन गया है. ये लोग पूरे शहर के सेप्टिक टेंकरो, छोटी कम्पनियों के वेस्ट मेटेरीअल को बिना किसी झिझक के अरावली पर्वत की जड़ों में खाली करके चले जाते हैं जो की एक दो दिन में धरती में उतर जाता है या उसे पीकर जानवर आदि अपनी जान दे रहे हैं. ये ठेकेदार अपने आप को नगर निगम के ठेकेदार बताते हैं.

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7. पुराने टायर जला कर Methanol निकालने का धंधा अरावली क्षेत्र में जोरों से चल रहा है. यहाँ बहुत सारी युनिटें हैं जो पूरे शहर से पुराने टायर इकट्ठे करके रात के टाइम उनमें आग लगा कर उसमे से Methanol नाम का द्रव्य निकालते हैं. डाक्टरों की मानें तो इस प्रोसेस के दौरान निकलने वाले धूएँ को Methanol Poisoning बोलते हैं जिसकी वजह से आस पास रहने वाले लोगों में कमजोरी, चक्कर आना, मिर्गी आना और श्वाश तंत्र को भारी नुक्सान पन्हुचाने वाली बीमारियाँ होती हैं. अगर हवा में इसके धूएँ की मात्रा बढ़ जाए तो आस पास रहने वाले इन्सानों और जानवरों की मौत तक हो जाती है. इसकी शिकायत कई बार की जा चुकी है परन्तु कोई कार्यवाही होती ही नहीं.
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8. पत्थर पीसने वाले क्रेशरों के बारे में तो आपने सुना ही होगा. कागजों की सुनें तो यहाँ करीब 250 क्रेशर हैं और वो सब ढके हुए माहोल में पत्थर पीस रहे हैं. लेकिन गूगल मैप से ही देखें तो उस पूरे इलाके में अजीब सी सफेदी छायी हुयी है. इन क्रेशरों के चार पांच किलोमीटर तक भी अगर लोग गलती से घर के बहार बैठ जाएँ तो नहाना पडेगा. आप पूरी तरह सफ़ेद हो जाओगे. इस तरह की धूल से सिलिकोइसिस, अस्थमा, टीबी और ना जाने कितने ही रोगों से कितने लोग मारे जा चुके हैं पिछ्ले पच्चीस सालों में. लेकिन इस इलाके की सुध लेने वाला कोई नहीं. कोई आपकी बात ही नहीं सुनेगा क्योंकि ये क्रेशर नेताओं और मंत्रियों के हैं.

इतना गंभीर मामला होते हुए भी किसी भी डिपार्टमेंट का ध्यान इस और नहीं जा रहा है बल्की आये दिन कोई ना कोई उल्टा सीधा प्रपोजल लेकर कोई ना कोई विभाग इस इलाके को तबाह करने का प्लान बना कर ले आता है.

अगर ऊपर लिखी गयी बातों पर तुरंत प्रभाव से कार्यवाही नहीं की गयी तो अगली कैंसर ट्रेन इसी इलाके से निकाली जायेगी. जो की सीधे सीधे यहां के अधिकारियों, नेताओं की जान बूझ कर की जा रही गलतियों के कारण होगा.

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  1. September 27, 2016, 5:06 pm
  2. September 27, 2016, 5:58 pm
  3. September 27, 2016, 5:59 pm
  4. September 27, 2016, 6:15 pm
  5. September 28, 2016, 3:30 pm